32 कंपनियों पर प्रशासनिक प्रतिबंध

जकार्ता — वन मंत्रालय (Kemenhut) ने सोमवार (19/10/2026) को जंगल और भूमि की आग (karhutla) को लेकर सात प्रांतों की 32 कंपनियों पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाए। इन कंपनियों से जुड़े जले हुए कुल क्षेत्र का दायरा 12,926.74 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

प्रतिबंधित कंपनियों की संख्या पहले के 26 से बढ़कर अब 32 हो गई है। पश्चिम कालीमंतन में सबसे अधिक समस्याग्रस्त कंपनियां दर्ज की गईं, जिनकी संख्या नौ है।

32 कंपनियों में से 19 के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं और 9,546.42 हेक्टेयर जले हुए क्षेत्र के साथ वन पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली का आदेश दिया गया है। आठ कानूनी संस्थाओं को 2,211.19 हेक्टेयर क्षेत्र की बहाली का आदेश दिया गया, जबकि पांच अन्य संस्थाओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए।

सात प्रांतों में कंपनियों का प्रसार

पश्चिम कालीमंतन की नौ कंपनियां प्रतिबंध सूची में शामिल हैं: PT MRU, PT WE, PT HKI, PT MPM, PT MPK, PT DAS, PT WSP, PT FI, और PT WLJ। मध्य कालीमंतन में सात कंपनियां सूची में हैं: PT PW, PT GPP, PT BHP, PT BWL, PT NES, PT DI, और PT TI।

वहीं दक्षिण कालीमंतन में पांच कंपनियां (PT IIP, PT HRB, PT DI, PT PM, PT KT), पूर्वी कालीमंतन में तीन कंपनियां (PT IITG, PT PSR, PT DPP), और उत्तरी कालीमंतन में एक कंपनी (PT RKR) शामिल है। कालीमंतन के बाहर, जाम्बी में दो कंपनियों (PT REI, PT ALN) और दक्षिण सुमात्रा में पांच कंपनियों (PT BMH, PT BPP, PT SAN, PT RHM, PT BA) पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाइसेंस धारकों द्वारा वन संरक्षण दायित्वों को पूरा किया जाए, साथ ही रियायती क्षेत्रों में आग के लिए जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय की जाए।

125 कानूनी संस्थाओं पर आपराधिक कार्रवाई

प्रशासनिक प्रतिबंधों के अतिरिक्त, वन मंत्रालय ने व्यक्तियों और निगमों सहित 125 कानूनी संस्थाओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की है। इनमें से 44 संस्थाएं प्रारंभिक जांच के चरण में हैं, जबकि 79 अन्य विस्तृत जांच के चरण में हैं।

जांचकर्ताओं ने 12 व्यक्तियों और एक निगम को संदिग्ध नामित किया है। दो अन्य कॉर्पोरेट कानूनी संस्थाएं P-22 चरण में पहुंच चुकी हैं, यानी संदिग्धों और साक्ष्यों को अभियोजक को सौंप दिया गया है।

वन कानून प्रवर्तन महानिदेशक द्विजानुआंतो नुग्रोहो (Dwi Januanto Nugroho) ने जोर देकर कहा कि आग से निपटना केवल आग बुझाने और धुएं के प्रभाव को संभालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। जानुआंतो ने कहा, 'जंगल की आग से निपटने के लिए जिम्मेदार पक्षों तक पहुंचना जरूरी है। बुझाने के अभियान के साथ-साथ परमिट उल्लंघनों के संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं।'

मंत्रालय आग से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के अंतिम लाभकारी मालिकों (beneficial owner) की भी जांच कर रहा है, साथ ही वन पारिस्थितिकी तंत्र को हुए नुकसान के मुआवजे के लिए मुकदमा दायर करने की संभावना तलाश रहा है। एक बहु-स्तरीय कानून प्रवर्तन दृष्टिकोण — प्रशासनिक प्रतिबंध, आपराधिक प्रक्रियाएं और पर्यावरणीय मुकदमे — एक साथ लागू किए जा रहे हैं।

सीमा पार धुआं चिंता का विषय

वन मंत्रालय ने जंगल की आग के सीमा पार प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। इंडोनेशिया ने कानून संख्या 26/2014 के माध्यम से सीमा पार धुंध प्रदूषण पर आसियान समझौते (ASEAN Agreement on Transboundary Haze Pollution) की पुष्टि की है, जबकि सिंगापुर सीमा पार धुआं प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए ट्रांसबाउंड्री हेज़ पॉल्यूशन एक्ट 2014 लागू करता है।

मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय नीतियों को सुदृढ़ करना जंगल की आग से निपटने और जहरीले धुएं से सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के संयुक्त प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।