सुबह की नमाज़ की नीयत
नियत नमाज़ का एक रुक्न है जो इबादत के सही या गलत होने का फैसला करता है। नियत की जगह दिल है, और इसे ज़ुबान से पढ़ना दिल को मज़बूत करने के लिए मुस्तहब है। नियत तकबीरतुल एहराम के साथ पढ़ी जाती है।
शुभ प्रभात की नमाज़ (2 रकात) की नीयत का पाठ निम्नलिखित है:
सुबह की फ़र्ज़ नमाज़ दो रकात क़िबला की ओर मुँह करके अल्लाह तआला के लिए अदा करता हूँ।
उशोल्ली फ़र्धोश शुभि रोक’आतैनी मुस्तक़बिलल क़िबलति अदा’अन लिल्लाहि त’आला। अर्थ: “मैं नमाज़ फ़र्ज़ सुबह दो रकात क़िबला की ओर रुख करके अल्लाह तआला के लिए अदा करने की नीयत करता हूं।”
दोपहर और अस्र की नमाज़ की नीयत
दोपहर की नमाज़ (4 रकात) की नीयत: أُصَلِّي فَرْضَ الظُّهْرِ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ أَدَاءً لِلَّهِ تَعَالَى — “Usholli fardhodh dhuhri arba’a roka’aatin mustaqbilal qiblati adaa’an lillaahi ta’aalaa.” अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए किबला की ओर मुंह करके चार रकात फ़र्ज़ दोपहर की नमाज़ की नीयत करता हूं।”
असर की नमाज़ की नीयत (4 रकात): أُصَلِّي فَرْضَ الْعَصْرِ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ أَدَاءً لِلَّهِ تَعَالَى — “Usholli fardhol ‘ashri arba’a roka’aatin mustaqbilal qiblati adaa’an lillaahi ta’aalaa.” अर्थ: “मैं असर की फ़र्ज़ नमाज़ चार रकात क़िबला की ओर मुँह करके अल्लाह तआला के लिए अदा करने की नीयत करता हूँ।”
मग़रिब और इशा की नमाज़ की नीयत
मग़रिब की नमाज़ की नीयत (3 रकात): أُصَلِّي فَرْضَ الْمَغْرِبِ ثَلاَثَ رَكَعَاتٍ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ أَدَاءً لِلَّهِ تَعَالَى — “Usholli fardhol maghribi tsalaatsa roka’aatin mustaqbilal qiblati adaa’an lillaahi ta’aalaa.” अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए क़िबला की ओर मुँह करके मग़रिब की तीन रकात फ़र्ज़ नमाज़ की नीयत करता हूँ।”
इशा की नमाज़ की नीयत (4 रकात): أُصَلِّي فَرْضَ الْعِشَاءِ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ أَدَاءً لِلَّهِ تَعَالَى — “Usholli fardhol ‘isyaa’i arba’a roka’aatin mustaqbilal qiblati adaa’an lillaahi ta’aalaa.” अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए किबला की ओर मुंह करके इशा की फ़र्ज़ नमाज़ चार रकात अदा करने की नीयत करता हूं।”
जमात की नमाज़ की नीयत: इमाम और मकतूम
जब जमात में मकमूम के रूप में नमाज़ पढ़ी जाती है, तो "लिल्लाही तआला" से पहले "मामूमन" का लफ़्ज़ जोड़ा जाता है। मकमूम के रूप में मग़रिब की नमाज़ की नीयत का उदाहरण: "उसल्ली फ़र्ज़ल मग़रिबि सलासा रकआतिन मुस्तक़बिलल क़िबलति अदाअन मामूमन लिल्लाही तआला।"
इसके विपरीत, जब इमाम बनें, तो "ma’muuman" शब्द को "imaaman" से बदल दिया जाता है। जबकि अकेले नमाज़ पढ़ने (munfarid) की स्थिति में, नियत का लफ़्ज़ इन दोनों में से किसी भी अतिरिक्त शब्द के बिना होता है, जैसा कि ऊपर उदाहरण में दिया गया है।
नियत पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
यह ध्यान रखें कि नीयत में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ दिल की सच्चाई है, न कि लफ़्ज़ों का छोटा-बड़ा होना। नीयत तकबीरतुल एहराम के साथ ही की जाती है — तकबीर पूरी होने के बाद जो नीयत दिल में आए, वह जुम्हूर उलमा के अनुसार काफ़ी नहीं है।
बच्चों को पाँच समय की नमाज़ की नीयत पढ़ना शुरू से सिखाएँ ताकि वे सही तरीके से नमाज़ अदा करने के आदी हो जाएँ। उम्मीद है कि हमारी हर नमाज़ Allah SWT के यहाँ कबूल हो।











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